deepawali 2020

Citifinance deepawali 2020
deepawali 2020

deepawali 2020 मनाएं, बिना जलाये कैसे जलेंगे दिए ?

एक वृक्ष, जिसकी सैकड़ों डालियाँ  हैं, एक तना और एक जड़,

ये वृक्ष – धर्म है

ये डालियाँ – प्रथाएं हैं, परम्पराएं हैं, मान्यताएं हैं, जीवन शैली है

ये तना – धर्म है, इंसानियत की रीढ़ की हड्डी है, जीवन का आधार है, आप चैन से जिओ और दूसरों को जीने दो

और ये जड़ – ये करुणा है,  ये वही शक्ति है, जो धर्म को अडिग रखती है, करुणा ही जीवन को स्थिर रखती है, डालियों मैं लहर देती है,करुणा के द्वारा ही इंसानियत की रक्षा होती है, परम्पराओं का जन्म या खात्मा होता है, पतझड़ या मानसून मैं भी धर्म का वृक्ष अडिग रहता है

कैसे जानें आप धार्मिक हो  ?परम्पराराओं का निर्वाह करना, प्रतिज्ञा मैं अटल रहना, या नियम या दिनचर्या मैं बंधे रहना, लोग इसे ही धार्मिक होने की पहचान मानते हैं, परन्तु वास्तव मैं ये मूर्खता है,

धर्म के 5 आधार हैं –

पहला – प्रेम

दूसरा – समर्पण

तीसरा – न्याय

चौथा – धैर्य

पांचवां –

इनका वास्तविक अध्यन करें

प्रेम

प्रेम – प्रेम आपके मस्तिष्क को शीतलता देता है,  किसी के प्रति,  प्रेम के भाव उत्पन्न करें, शीतलता अभी महसूस करें

समर्पण

समर्पण – शरीर को  स्थिर रखता है, गुस्से मैं या हतोत्साहित होते समय, यदि स्वयं को जीत या हार, स्वाभिमान या अभिमान, अर्थात सत्य के प्रति समर्पित हो जाएँ, अपनी अकड़ निकाल दें, तो शरीर मैं फिर से स्थिर हो जाएगा

न्याय

न्याय – न्याय आपकी आत्मा को स्थिर करता है, हर बार मोह का त्याग कर, जब आप न्याय करते हैं, तो स्वयं मैं गर्व महसूस होता है, अभी महसूस कीजिये

धैर्य

धैर्य – जब हम किसी वस्तु/व्यक्ति या अहम् के प्रति –   आकर्षित होते हैं, तो  आकर्षण के कारण,  हमारा पूरी शक्ति  क्षीण होने लगती है, आतुरता के कारण, लोगों को हार्टअटैक हो जाता है,  यदि उस समय आप स्वयं मैं धैर्य रख पाएं, तोआपका शरीर स्थिर हो जाता है

ज्ञान

ज्ञान – ज्ञान आपकी बुद्धि  रखता है, अधिकतर जो दिखाई देता है, लोग अपने अपने मोह, और हितों  के कारण उसे सत्य मान लेते हैं, परन्तु बुद्धि को को निष्पक्ष रख कर चुनाव करना कठिन हो जाता है, ऐसे मैं आप अपनी ज्ञान के माध्यम से, निर्णय लेने से पूर्व, उस स्थिति को दो भागों मैं बांटें, एक तो अपना हित सोचकर, तर्क करें, एक स्वयं को अपना विपक्षी सोचकर निर्णय लें, तभी सही निर्णय ले पाओगे

दरअसल धर्म कोई चमत्कार नहीं, ये जीवन जीने का सही तरीका है, हंसी, दुःख, प्रेम, धैर्य, ये भाव हमारे महापुरुषों द्वारा बनाये गए हैं, ठीक उसी तरह, जिस तरह 15-20 साल पहले, हमने बोर होने का भाव बनाया, उससे पहले लोग बोर नहीं होते थे, यात्रा के नए संसाधन, गैस, बिजली, इंटरनेट, वाशिंग मशीन, इन अविष्कारों ने, दिनचर्या का समय बचा दिया, हम अब बोर होने लगे, मैं फिर से कह रहा हूँ, ये लेख, पढ़कर भूलने के लिए नहीं, अपने बच्चों का सही मार्गदर्शन करने  के लिए है, अगर इस तरह की बातों को, अपने बच्चों  के साथ करने मैं, हिजक या शर्म भी महसूस हो तो कोई नहीं, पर समाज को, जीवन को उन्नत करने मैं सहयोग दें, दुर्भाग्य है हमारा जो ज्ञान की बातों का विस्तार करने मैं शर्म महसूस होती है, और बेवकूफी की बातों मैं आनंद और सम्मान   

धर्म एक चमत्कार

देखो दो मूर्खों को मूर्खता मैं आनंद मिलता है, शराबियों को बकवास बाजी मैं, सम्मान मिलता है, और समझदारों को समझदारी मैं अपमान महसूस होता है